मनोविज्ञान की प्रमुख परिभाषाएं या कथन / मनोवैज्ञानिकों की प्रमुख परिभाषाएं

दोस्तों अगर आप बीटीसी, बीएड कोर्स या फिर uptet,ctet, supertet,dssb,btet,htet या अन्य किसी राज्य की शिक्षक पात्रता परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो आप जानते हैं कि इन सभी मे बाल मनोविज्ञान विषय का स्थान प्रमुख है। इसीलिए हम आपके लिए बाल मनोविज्ञान के सभी महत्वपूर्ण टॉपिक की श्रृंखला लाये हैं। जिसमें हमारी साइट istudymaster.com का आज का टॉपिक मनोविज्ञान की प्रमुख परिभाषाएं या कथन / मनोवैज्ञानिकों की प्रमुख परिभाषाएं है।

मनोविज्ञान की प्रमुख परिभाषाएं या कथन / मनोवैज्ञानिकों की प्रमुख परिभाषाएं

मनोविज्ञान की प्रमुख परिभाषाएं या कथन / मनोवैज्ञानिकों की प्रमुख परिभाषाएं

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(1) शिक्षा की परिभाषा

“मनुष्य की पूर्व निहित पूर्णता को अभिव्यक्ति करना ही शिक्षा है।” – स्वामी विवेकानंद

“शिक्षा से मेरा अभिप्राय बालक तथा मनुष्य के शरीर, मस्तिष्क तथा आत्मा के सर्वांगीण तथा सर्वोत्तम विकास से है।” – महात्मा गांधी

“स्वस्थ शरीर में स्वस्थ्य मस्ष्कि का निवास होता है।” – अरस्तु

“शिक्षा से तात्पर्य अन्तर्निहित शक्तियों तथा बाह्य जगत के मध्य समन्वय स्थापित करने से है।” -हरबर्ट स्पेन्सर

“शिक्षा व्यक्ति की समस्त जन्मजात शक्तियों का स्वभाविक समरस तथा प्रगतिशील विकास है।” -पेस्ट्रोलॉजी

(2) मनोविज्ञान की परिभाषा

“मनोविज्ञान, व्यवहार का निश्चित विज्ञान है।” – वाटसन

“मनोविज्ञान, जीवन की सभी प्रकार की परिस्थितियों में प्राणी की प्रक्रियाओं का अध्ययन करता है। मनोविज्ञान व्यवहार और अनुभव का विज्ञान है।” – स्किनर

“मनोविज्ञान वातावरण के सम्बन्ध में व्यक्ति की क्रियाओं का वैज्ञानिक अध्ययन है।” – वुडवर्ड

“आधुनिक मनोविज्ञान का सम्बन्ध व्यवहार की वैज्ञानिक खोज है।” – मन

“मनोविज्ञान मानव व्यवहार का और मानव सम्बन्धों का अध्ययन है।” क्रो एंड क्रो

“मनोविज्ञान व जीवित वस्तुओं के व्यवहार का विधायक विज्ञान है।” – मैकडूगल

(3) अभिप्रेरणा की परिभाषाएं

“प्रेरणा कार्य को आरम्भ करने, जारी रखने और नियमित करने की प्रक्रिया है। -वुड

“प्रेरणा एक प्रक्रिया है जिसमें सीखने वाले की आन्तरिक शक्तियाँ या आवश्यकतायें उसके वातावरण में विभिन्न लक्ष्यों की ओर निर्देशित होती है।” – ब्लेयर जोंस एवं सिम्पसन

“शिक्षा को शारीरिक मानसिक तथा बौद्धिक विकास की प्रक्रिया माना है। – प्लेटो

“सा विद्या या विमुक्तये’ – उपनिषद

“शिक्षा का अर्थ उन सर्वमान्य विचारों को विकसित करना है जो प्रत्येक मनुष्य के मस्तिष्क में विलुप्त है।”- सुकरात

“मुझे नवजात शिशु दो मैं उसे डॉक्टर, चोर व वकील आदि बना सकता हूँ।” – वाटसन

(4) बुद्धि की परिभाषाएं

“वे यह निश्चित नहीं कर सके कि बुद्धि में स्मृति, कल्पना, भाषा,
अवधान गामक योग्यता और संवेदना सम्मिलित है। या नहीं।” – रॉस
“बुद्धि कार्य करने की एक विधि है।” – वुडवर्ड

“बुद्धि ज्ञान का अर्जन करने की क्षमता है।” – बुडरो

“बुद्धि अमूर्त विचारों के बारे में सोचने की योग्यता है।” – टर्मन

“बुद्धि पहचानने व सीखने की शक्ति है।” – गार्डनर

“सीखने की योग्यता ही बुद्धि है। ” – बकिंघम

“बुद्धि अच्छी तरह निर्णय करने व तर्क करने की योग्यता है।” – बर्ट

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(5) विकास की परिभाषाएं

“विकास केवल अभिवृद्धि तक ही सीमित नहीं है, वरन वह व्यवस्थित तथा समनुगत परिवर्तन है।” – हरलॉक

“सामाजिक विकास का अर्थ सामाजिक सम्बन्धों में परिपक्वता प्राप्त करना है।” – हरलॉक

“विकास परिवर्तन श्रृंखला की वह अवस्था है जिसमें बच्चा भ्रूणावस्था से लेकर बृद्धावस्था तक गुजरता है विकास कहलाता है।” – मुनरो

“विकास प्रक्रियाओं की निरन्तरता का सिद्धान्त केवल इस तथ्य पर बल देता है कि व्यक्ति में कोई आकस्मिक परिवर्तन नहीं होता है।” – स्किनर

“मानव का विकास एक निश्चित क्रम में होता है” – गैसेल

“विकास मस्तिकाधोमुखी और निकट दूर क्रम में होता है।” – कुप्पूस्वामी

“मनुष्य सर्वप्रथम एक शारीरिक प्राणी है।” – क्रो एंड क्रो

“विकास लयात्मक होता है नियमित नहीं है।” – हरलॉक

“विकासात्मक कार्य का सर्वप्रथम संप्रत्यय दिया” – हेविंगहर्स्ट

(6) शैशवावस्था से सम्बन्धित परिभाषाएं

“जीवन के पहले 4-5 वर्षों में बालक भावी-जीवन की नींव रख लेता हैं” -फ्रायड

“शैशवावस्था जीवन की आधारशिला है।” – फ्रायड

“शैशवावस्था सीखने का आदर्शकाल है।’ -वैलेन्टाइन

“शैशवावस्था में सीखने की सीमा और तीव्रता विकास की और किसी अवस्था से बहुत अधिक होती है।” – वाटसन

“व्यक्ति का जितना विकास होता है उसका आधा विकास-3 वर्षों में ही हो जाता है। ” – गुडएनफ

“बालक के हाथ-पैर व नेत्र उसके आरम्भिक शिक्षक है।” – रूसो

”प्रथम के 2 वर्षों में बालक अपने भावी जीवन का शिलान्यास करता है।” – स्टैंग

“शिशु कल्पना का नायक है” – रॉस

“शिशु के जन्म के कुछ समय बाद ही वह यह निश्चित किया जा सकता है कि भविष्य में उसका स्थान क्या है।” – एडलर

“5 वर्ष तक की अवस्था शरीर व मस्तिष्क के लिए बड़ी ग्रहण शील है”– न्यूमेन

“20वीं शताब्दी को “बालक की शताब्दी कहा जाता है” – क्रो एंड क्रो

(7) बाल्यावस्था की परिभाषाएं

बाल्यावस्था वह काल है जब व्यक्ति के बुनियादी दृष्टिकोण, मूल्य तथा आदर्श एक बड़ी सीमा तक निरूपित किये जाते हैं।” – ‘ब्लेयर जोन्स व सिम्पसन’

“शैक्षिक दृष्टिकोण से जीवन चक्र में बाल्यावस्था से महत्वपूर्ण और कोई अवस्था नहीं है।” – ‘ब्लेयर जोन्स व सिम्पसन’

“बाल्यावस्था मिथ्या परिपक्वता का काल है । “– रॉस

“बाल्यावस्था प्रतिद्वन्द्वात्मक समाजीकरण का काल है। “– किलपैट्रिक

“बाल्यावस्था जीवन का अनोखा काल है।”– कार्ल एवं ब्रूस

“ऐसा शायद ही कोई खेल है जिसे 40 वर्ष का बालक न खेलता हो ।” – स्टैंग

“बाल्यावस्था को जीवन की निर्माणकारी व काम की प्रसुप्तावस्था कहा है।” – फ्रायड

”बाल्यावस्था भ्रमण व साहसिक कार्य ही प्रवृत्ति में वृद्धि होती है।” – बर्ट

(8) किशोरावस्था से सम्बन्धित परिभाषाएं

“किशोरावस्था प्रबल दबाव व तनाव, तूफान एवं संघर्ष की अवस्था है। ” – स्टेनलीहॉल

“किशोरों में जो शारीरिक मानसिक व संवेगात्मक परिवर्तन होते हैं, वे अकस्मात होते है।” – स्टेनलीहॉल

“किशोरावस्था जीवन का सबसे कठिन काल है।।” – किलपैट्रिक

“व्यक्तित्व एवं घनिष्ट मित्रता किशोरावस्था की विशेषताएँ होती है।”– वैलेंटाइन

“किशोरावस्था अपराध प्रवृत्ति के विकास का नाजुक समय है।” – वैलेंटाइन

“किशोरावस्था परिपक्वता प्राप्त करने की अवस्था है।” – जरशील्ड

“किशोरावस्था, शैशवावस्था की पुनरावृत्ति है।” – जोंस,रॉस, एरिक्सन

“किशोरावस्था समाजसेवा के आदर्श उपस्थित करने की अवस्था है।” – रॉस

“किशोरों को निर्णय लेने का कोई अनुभव नहीं होता।” – स्किनर

“किशोरावस्था, बाल्यावस्था और प्रौढ़ावस्था के मध्य का परिवर्तन काल है।” – कुल्हन

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(9) अधिगम की परिभाषाएं

“सीखना विकास की प्रक्रिया है।” – वुडवर्ड

“व्यवहार में कोई भी परिवर्तन जो कि अनुभवों का परिणाम है और जिसके फलस्वरूप व्यक्ति आने वाली स्थितियों का भिन्न प्रकार से सामना करता है सीखना कहलाता है।” – ब्लेयर,जोन्स,सिम्पसन

“अधिगम व्यवहार में व्यवस्थापन व उत्तरोत्तर अनुकूलन की प्रक्रिया है।” – स्किनर

“व्यवहार के कारण व्यवहार में आया कोई भी परिवर्तन अधिगम कहलाता है।” – गिलफोर्ड

“आदतों ज्ञान तथा अभिवृत्तियों का अर्जन ही अधिगम है।” – क्रो एंड क्रो

“अधिगम किसी परिस्थिति में भिन्न ढंग से कार्य करने की क्षमता है।” – एडविन गुथरी

(10) वंशानुक्रम की परिभाषाएं

“वंशानुक्रम, व्यक्ति की जन्मजात विशेषताओं का पूर्ण योग है।”– बी ० एन० झा

“वंशानुक्रम माता-पिता से सन्तान को प्राप्त करने वाले गुणों का नाम है।” – रूथ वैडिक्ट

“माता-पिता की शारीरिक एवं मानसिक विशेषताओं का सन्तानों में हस्तांतरण होना वंशानुक्रम है।” – जेम्स ड्रेवर

“व्यक्ति को अपने माता-पिता से पूर्वजों को जो विशेषतायें प्राप्त है उसे वंशक्रम कहते हैं।” – पीटरसन

“वंशानुक्रम, क्रमबद्ध पीढ़ियों के बीच उत्पत्ति सम्बन्धी सम्बन्ध के लिए सुविधाजनक शब्द है।” – थामसन

“जब वर्णसंकर अपने स्वयं के पितृ या मातृ उत्पादक कोषों का निर्माण करते हैं, तब वे प्रमुख गुणों से युक्त माता-पिता के
समान शुद्ध प्रकारों को जन्म देते है।” – बी ० एन० झा

(11) वातावरण की परिभाषाएं

”पित्र्यैकों के अलावा व्यक्ति को प्रभाविक करने वाली वस्तु वातावरण है।” – बोरिंग ,लैंगफील्ड व वेल्ड

“बातावरण में वे सब बाह्य तत्व आ जाते हैं जिन्होंने व्यक्ति को जीवन आरम्भ करने के समय से प्रभावित किया है।” – वुडवर्ड

“वातावरण वह बाहरी शक्ति है जो हमें प्रभावित करती है।”– रॉस

“वातावरण वह हर वस्तु है जो व्यक्ति के पित्र्यैको के अतिरिक्त प्रत्यके वस्तु को प्रभावित करता है।” – एनास्टसी

“व्यक्ति, वंशक्रम तथा वातावरण का योग नहीं, गुणनफल है।”– वुडवर्ड

“व्यक्ति का निर्माण न केवल वंशानुक्रम और न केवल वातावरण से होता है। वास्तव में वह जैविक दाय और सामाजिक विरासत के एकीकरण की उपज है।” – क्रो एंड क्रो

(12) व्यक्तित्व की परिभाषा

“व्यक्तित्व व्यक्ति के भीतर उन मनोशारीरिक तंत्रों का गत्यात्मक संगठन है जो वातावरण में उसके अपूर्व समायोजन को निर्धारित करते हैं।” – आलपोर्ट

(13) संवेगात्मक बुद्धि की परिभाषाएं

“संवेग, व्यक्ति की उत्तेजित दशा है।” -बुडवर्थ

“संवेग, गतिशील आन्तरिक समायोजन है, जो व्यक्ति के संतोष, सुरक्षा और कल्याण के लिए कार्य करता है।” – क्रो एंड क्रो

“रागात्मक प्रवृत्ति के वेग के बढ़ने को संवेग कहते हैं।” – वैलेंटाइन

“किसी भी प्रकार के आवेश आने, भड़क उठने तथा उत्तेजित हो जाने की अवस्था को संवेग कहते हैं। -जरसील्ड

“नवजात शिशु में संवेग पाये जाते हैं (भय, क्रोध, प्रेम) -वाटसन

“जन्म के समय शिशु में केवल एक संवेग उत्तेजना होता है तथा 2 वर्ष की आयु तक सभी संवेगों का विकास हो जाता है।” -ब्रिजेज

“सामाजिक और संवेगात्मक विकास साथ-साथ चलता है।” – क्रो एंड क्रो

“संवेग-चेतना की वह अवस्था है जिसमें रागात्मक तत्व की प्रधानता रहती है।” – रॉस

(14) समायोजन की परिभाषाएं

“समायोजन अधिगम की एक प्रक्रिया है।” – स्किनर

“एक अच्छा समायोजन वह है जो यथार्थ पर आधारित व सन्तोष देने वाला होता है।” – स्मिथ

“समायोजन व्यक्ति की आवश्यकताओं की पूर्ति तथा कठिनाइयों
निराकरण के प्रयासों का परिणाम है।” -कॉलमैन

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(15) पिछड़े बालक की परिभाषाएं

”सामान्यतया पिछड़े बालक वे होते हैं जिनकी शैक्षिक उपलब्धि
उनकी स्वाभाविक योग्यताओं से कम होती है।” – बार्टन हॉल

“पिछड़े बालक वे होते हैं, जो अपनी आयु स्तर की कक्षा से एक
सीढ़ी नीचे की कक्षा का कार्य करने में भी असमर्थ होते हैं।” – बर्ट

“पिछड़े बच्चे वह है जिसकी शैक्षिक या शिक्षा का अंक 85 से कम हो” – सिरिबर्ट

(16) प्रतिभाशाली बालक की परिभाषाएं

“प्रथम-ऐसे बालक जिसकी बुद्धिलब्धि 130+ तथा वे बालक भी
प्रतिभाशाली बालकों की श्रेणी में आते हैं जो किसी विशिष्ट क्षेत्र (कला, नृत्य,संगीत, खेल इत्यादि) में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हैं।” – क्रो एंड क्रो

“प्रतिभाशाली बालक, शारीरिक विकास, शैक्षिक उपलब्धि, बुद्धि और व्यक्तित्व में श्रेष्ठ होते हैं।” – टरमन

“A survey of the Education of Gifted Children” – हैविंग हर्स्ट

(17) व्यक्तिगत विभिन्नता की परिभाषाएं

“सर्वप्रथम व्यक्तिगत विभिन्नता का सम्प्रत्यय दिया गया।” – गॉल्टन

“शरीर के रूप, रंग, आकार, सीखने की गति, बुद्धि, समृद्धि,
उपलब्धि, रुचि, अभिरुचि, आदि पक्षों में पायी जाने वाली भिन्नता को व्यक्तिगत विभिन्नता कहते हैं।” – टायलर

“व्यक्तिगत विभिन्नता के अन्तर्गत व्यक्तित्व के वे सभी पहलू आ जाते हैं,जिनका मापन व मूल्यांकन किया जा सकता है।” – स्किनर

“कोई व्यक्ति अपने समूह के सदस्यों के शारीरिक तथा मानसिक
गुणों के औसत से जितनी भिन्नता रखता है, उसे वैयक्तिक भिन्नता कहते हैं।” – ड्रेवर

(18) मानसिक विकास की परिभाषाएं

“बालक का मस्तिष्क कोरा स्लेट होता है। ” – प्लेटो

“बालक का मस्तिष्क कोरा कागज होता है, जिस पर अनुभव लिखता है।” – जॉन लॉक

“बालक का मन कोरा कागज होता है।” – रूसो

“जन्म के समय बच्चे का मन साफ स्लेट की तरह होता है।” – विलयम जेम्स

“आनुवांशिकता माता-पिता से बच्चों में विशिष्ट गुणों का संक्रमण है।” – रूथ बेनेडिक्ट

“बच्चे दुनिया के बारे में अपनी समझ का सृजन करते हैं” – पियाजे

“वह जो एक स्कूल खोलता है, एक जेल बन्द करता है।”– ह्यूगो

(19) स्मृति की परिभाषाएं

“पूर्व समय में सीखी हुई बातों को याद रखना ही स्मृति है।” –वुडवर्ड
“स्मृति से तात्पर्य अतीत की घटनाओं की कल्पना करना और इस तथ्य को पहचान लेना कि ये अतीत के अनुभव है।” –मैकडूगल

(20) कल्पना की परिभाषाएं

“परोक्ष वस्तुओं के सम्बन्ध में चिन्तन करना ही कल्पना है” – मैकडूगल

“मनोविज्ञान में ‘कल्पना’ शब्द का प्रयोग सब प्रकार की प्रतिमाओं के
निर्माण को व्यक्त करने के लिए किया जा सकता है।” – डमविल



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